एक लड़का था अंजाना सा

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एक लड़का था अंजाना सा
एक लड़का था अंजाना सा

एक सत्य घटना पर आधारित

 

कविता का नाम- एक लड़का था अंजाना सा

 

एक था लड़का अंजाना सा
रहता था बेगाना सा ।।

हुआ प्यार उसे बचपन में
पहली या दूसरी नजर में ।।

त्योहारों में लड़की से मुलाकात हुई
नजरों नजर में प्यार हुई ।।

लड़की उसको देख शरमाई
लड़के को भी उसे देख शर्म आई ।।

धीरे-धीरे दोनों में प्यार हुआ
आगे चलकर इज़हार हुआ ।।

फ़ोन पर बातें होने लगी
प्यार भारी बातें बढ़ने लगी ।।

फिर आगे मुलाकात हुई
जन्म जन्म साथ रहने की बात हुई ।।

प्यार के लगे चर्चे बढ़ने
दुनिया द्वारा लगे घर पहुँचने ।।

मम्मी-पापा ने हल निकाला
धीरे से एक फैसला सुना डाला ।।

दोनों के परिवारों में मुलाकात हुई
फिर दोनों के शादी की बात हुई ।।

लड़की लड़के झूम उठे
जैसे पतझड़ के मौसम में फूल खिले ।।

दोनों लगे नये-नये सपने बुनने
अपने बच्चों के नाम चुनने ।।

होने लगी जेवर की खरीदारी
लड़का समझ चुका लड़की को अपनी जिम्मेदारी ।।

तभी लड़के के पड़ोसी ने कहि एक बात
सुन लड़का हुआ बेबाक़ ।।

लड़की का था किसी और से चक्कर
सुन लड़का हुआ घनचक्कर ।।

अपने होने वाली बीबी के बारे में सुन यह बात
लड़का सो नही पाया दिन रात ।।

लड़का पूछ दिया लड़की से ये बात
विश्वाश नहीं है बोल छोड़ दिया लड़की ने साथ ।।

कुछ महीनों ही बाद सुनने में आयी नई बात
लड़की ने चुन ली किसी और का साथ ।।

लड़के को गलती समझ न आई
पल भर में 9 साल का प्यार गवाई ।।

इसीलिए तो हमने पहले ही बोला

एक लड़का था अंजाना
रहता था बेगाना सा ।।

 

 

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